न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान को लेकर एक कड़ी चेतावनी दी है, जिसमें उन्होंने बगराम एयरबेस (Bagram Airbase) को संयुक्त राज्य अमेरिका को फिर से सौंपने की मांग की। यह बयान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी किया, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर अफगानिस्तान बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस नहीं करता, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
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ट्रंप का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में सैन्य रणनीतिक स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। बगराम एयरबेस अमेरिकी सेना के लिए 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद से एक प्रमुख सैन्य संचालन केंद्र के रूप में कार्य करता था। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद यह एयरबेस तालिबान के कब्जे में चला गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि अमेरिका इस एयरबेस पर फिर से नियंत्रण प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि इस मुद्दे पर अफगानिस्तान से बातचीत चल रही है, और अगर आवश्यक हुआ, तो अमेरिकी सेना फिर से इस एयरबेस पर कब्जा करने के लिए कदम उठा सकती है।

तालिबान शासन ने ट्रंप की इस टिप्पणी का विरोध किया है। अफगानिस्तान के सरकारी रेडियो और टेलीविजन (आरटीए) ने एक वरिष्ठ अफगान अधिकारी के हवाले से बताया कि अफगानिस्तान कभी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को स्वीकार नहीं करेगा। इस अधिकारी का कहना था कि अमेरिका और अफगानिस्तान को द्विपक्षीय सम्मान और साझा हितों पर आधारित राजनीतिक और आर्थिक संबंधों की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि बगराम एयरबेस पर अमेरिकी नियंत्रण की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बीच, ट्रंप ने 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति जो बाइडेन की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सेना को बगराम एयरबेस छोड़ने का फैसला गलत था और इस फैसले के परिणामस्वरूप अमेरिका को बाद में भारी नुकसान हो सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि वे बगराम एयरबेस को फिर से हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। बगराम एयरबेस, जो काबुल से 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित है, अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन बलों के लिए अफगानिस्तान में मुख्य सैन्य अड्डा था। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद से यह एयरबेस तालिबान के कब्जे में है और अब अमेरिका इसे फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहता है।